रांची: पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने रखा बिहार का पक्ष, गाद प्रबंधन व जल बंटवारे पर बनी सहमति

Ranchi: Deputy CM Samrat Chaudhary presented Bihar's side in the Eastern Regional Council meeting, consensus reached on silt management and water sharing

रांची/पटना: झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की ओर से कई महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती से उठाया। बैठक में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को बिहार के विकास में सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।

गृह मंत्री अमित शाह ने सम्राट चौधरी द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से सुना और कई मामलों में सहमति भी बनी।

गंगा व कोसी नदी से गाद प्रबंधन पर बनी सहमति
सम्राट चौधरी ने बताया कि बिहार हर साल गंगा, कोसी और अन्य नदियों में जल स्त्राव और गाद जमाव के कारण बाढ़ की मार झेलता है। इस समस्या से स्थायी निजात के लिए एक व्यापक गाद प्रबंधन नीति बनाए जाने पर बैठक में सहमति बनी है।

जल बंटवारा: इन्द्रपुरी जलाशय व सोन नदी
बैठक में इन्द्रपुरी जलाशय और वाणसागर समझौते के तहत सोन नदी के जल बंटवारे पर भी चर्चा हुई। इसमें तय हुआ कि बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.00 MAF पानी मिलेगा। यह बंटवारा अविभाजित बिहार के पुराने समझौते के अनुसार ही किया गया है।

फरक्का बैराज और गंगा की अविरलता
सम्राट चौधरी ने फरक्का बैराज के निर्माण से गंगा की धारा पर पड़े प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित किया और आग्रह किया कि कटाव रोकने के लिए बिहार-पश्चिम बंगाल सीमा पर होने वाला संपूर्ण खर्च भारत सरकार वहन करे। इस प्रस्ताव पर भी गाद प्रबंधन नीति के तहत सहमति बनी।

जल प्रबंधन के लिए समन्वित नीति की मांग
उन्होंने गंगा, नेपाल और अन्य राज्यों से आने वाली नदियों के बेहतर जल प्रबंधन के लिए एक समन्वित और व्यापक नीति बनाए जाने की जरूरत बताई। इसके अलावा, सीमावर्ती इलाकों के विकास, राज्यों के आपसी सहयोग और दीर्घकालिक समस्याओं के समाधान पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

क्षेत्रीय विकास को नई दिशा
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से अब क्षेत्रीय विकास को नई गति मिल रही है। वर्षों से लंबित समस्याओं पर अब ठोस पहल हो रही है, और यह बैठक राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है।

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